वेयर हाउस खुलने से निर्यात को मिलेगा बढ़ावा 
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार को दिए गये हैं 15 नये प्रस्ताव- सिद्धनाथ सिंह 
परिषद के उपाध्यक्ष ने एकमा पर साधा निशाना, कहा मशीन मेड को बढ़ावा देने वालो को दियह जा रहा मच 
 भदोही।  विदेशी बाजारों में भारतीय कालीन उधमियों के अच्छे दिन आने वाले हैं । अब जल्द ही चाइना में भारतीय कालीनों का दबदबा देखने को मिलेगा इसके लिए भारत सरकार के सहयोग से कालीन निर्यात को बढ़ावा देने के लिए चाइना में जल्द ही एक  खुलेगा।
इसके बारे में कपड़ा मंत्रालय के अधीन कालीन निर्यात सम्वर्धन परिषद के चेयरमैन महावीर शर्मा ने भदोही में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में बताया कि चाइना के ईयू शहर में एक वेयर हाउस खोलने की तैयारी है जिसके लिए सरकार के सहयोग से लगभग सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गयी हैं। इससे भारत का कालीने निर्यात दो हजार करोड़ तक बढ़ सकता है। वहां वेयर हाउस बनने से निर्यातक अपना माल रख सकेंगे और मार्केटिंग कर सकेंगे। इसके लिए परिषद ने चैन में एक कम्पनी भी रजिस्टर्ड कराई है जो वहां पर निर्यातकों के उत्पाद हो रखेगी जहां से निर्यातक खुद भी अपने माल आयातक को दे सकेगी और परिषद भी निर्यातको के उत्पादों की मार्केटिंग कराएगी। इससे छोटे निर्यातको को काफी फायदा होगा। उन्होने कहा कि चाइना में ड्यूटी व वैट मिलाकर 34 फीसदी है जिसे कम कराने का प्रयास हो रहा है। चाइना में कुल पांच फेयर आयोजित होते हैं जिसमे भारत के काफी निर्यातक भाग लेते हैं। इस वेयरहाउस बन जाने से वह अपने उत्पादों को वहां रख सकेंगे जिससे बार बार उत्पाद चाइना से इंडिया वापस न लेना पड़े और वराह भर निर्यातक अपने उत्पाद की वहां मार्केटिंग कर सके। उन्होने बताया की परिषद ऐसे देशों
पर फोकस करने जा रही है जहां से हमारे उत्पाद को रिएक्सपोर्ट किया जाता है। उन्होने कहा

कि सरकार हो नए देशों में कालीन निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 15 नए प्रपोजल दिए गए हैं।

 

साथ ही बताया कि परिषद कालीन के पॉल्यूशन फ्री विषय पर एक रिपोर्ट तैयार करा रही है जिसमे आयातकों को बताया जा सके कि हमारा उत्पाद पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है। उद्योग में महिला बुनकर को ट्रेनिंग देने, कालीन पर पांच फीसदी जीएसटी की मांग के साथ ड्रा बैक समाप्त हो के कब बाद आरओएसएल स्कीम के तहत कालीन उद्योग को शामिल कर इसका लाभ मिलने से ड्रा बैक का नुकसान काफी हद तक कम हो जाएगा।
श्री शर्मा ने कहा कि हस्तनिर्मित कालीन को मशीन निर्मित कालीनों से कड़ी टक्कर मिल रही है। इसका मुकाबला करने के लिए सभी को मिलकर दुनिया के तमाम देशों को बताना होगा कि हस्तनिर्मित कालीन उत्पाद ही नही बल्कि एक कला है और इसे कला के रूप में देखा जाना चाहिए। इससे इस उद्योग से ताकत मिलेगी। इस दौरान परिषद के उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह, संदीप कटारिया, उमेश गुप्ता, अब्दुल रब, रजा खान, जफर हुसैनी सहित परिषद अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

प्रेस वार्ता में परिषद के उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि अखिल भरतीय कालीन नई को कुछ वर्षो से आम निर्यातको से दूर कर दिया गया है। जिन उद्देश्यों के लिए एकमा की स्थापना की गई थी उन उद्देश्यों से एकमा दूर जा रही है। उंन्होने कहा कि कुछ दिन पूर्व हैंडमेड के विरोधी को एकमा के मंच दिया गया और हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के सम्मान से खिलवाड़ किया गया। झूठा प्रचार किया जा रहा है कि परिषद भदोही एक्सपो मार्ट में फेयर लगाने के पक्ष में नही है जबकि अभी तक यह तय नही हुआ कि मार्ट का मालिक कौन है और दुनिया से आने वाले आयातकों के स्तर की सुविधाएं यहां उपस्थित है कि नही। लोग अपनी गलती छिपाने के लिए परिषद पर फेयर न लगने का आरोप लगा रहे हैं जबकि अभी भी मार्ट में काफी कमियां हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.