भदोही। भदोही में 220 करोड़ की लागत से बनकर तैयार कारपेट एक्सपो मार्ट का प्रबंधन और संचालन कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) करेगी। प्रदेश सरकार के निर्णयानुसार इसे 10 वर्ष के लिए लीज पर दिए जाने के लिए बुधवार को कानपुर स्थित उद्योग निदेशालय में निविदा के आर्थिक पहलुओं पर गौर करते हुए सीईपीसी का चयन किया गया। बिड करने वाली बाकी दो फर्में थीं नोएडा की ट्राईडेंट एक्जिबिशंस और भदोही की एक्सपो मार्ट सोसाइटी थी अंतिम रूप से भदोही कारपेट एक्सपो मार्ट सोसाइटी और कालीन निर्यात संवर्धन परिषद्  दौड़ में थी लेकिन बिड की राशि और अनुभव को देखते हुए परिषद्र की सफलता मिली  है।

टेंडर खोले जाने के समय मौके पर मौजूद सीईपीसी के अधिशासी निदेशक संजय कुमार ने बताया कि सीपीसी ने 8.86 लाख प्रति माह जबकि एक्सपो मार्ट सोसाइटी ने प्रति माह 2.37 लाख भुगतान का टेंडर भरा था। इसके अलावा कहा जा रहा है कि सीईपीसी से बीते साढ़े तीन दशक से भारत में प्रति वर्ष दो कारपेट एक्सपो का आयोजन करना और वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार की अर्ध सरकारी संस्था होने का भी लाभ मिला।

उसके बाद सीईपीसी के उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने प्रेस वार्ता करके कहा की कहा कि कारपेट एक्सपो मार्ट के संचालन के लिए परिषद ने पांच वर्ष का खाका तैयार कर लिया है। साल में आठ एक्सपो करने की योजवना है। भदोही कारपेट एक्सपो मार्ट को सफल बनाने के लिए इसे केवल कालीन ही नहीं बल्कि हैंडीक्राफ्ट काउंसिल, लेदर काउंसिल, हैंडलूम, जूट काउंसिल समेत हैंडीक्राफ्ट्स, टेक्सटाइल्स उत्पादकों से जोड़ा जाएगा। कहा कि भदोही में आयोजनों को सफल बनाने के लिए सरकार से अपेक्षा है कि भदोही-वाराणसी समेत भदोही से अन्य जनपदों को जोड़ने वाली सड़कों को विश्व स्तरीय बनाया जाए ताकि आवागमन सुगम हो।  उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की मंशा कारपेट एक्सपो मार्ट पर कब्जा करने की थी जिसे परिषद् ने नाकाम कर  दिया ।

हालाकि इसके पूर्व भदोही के विधायक जाहिद बेग सितम्बर माह में अपने  आवास पर प्रेस वार्ता कर कहा कि यह भदोही के कालीन उद्योग को खत्म करने की साजिश है। एलान किया कि यदि भदोही के नवनिर्मित कारपेट एक्सपो मार्ट में मेला आयोजित न हुआ तो मेले के दौरान वे कारपेट एक्सपो मार्ट पर अकेले धरना देंगे।उन्होंने कहा था की  भदोही का मार्ट शुद्ध रूप से कारपेट एक्सपो मार्ट है। कहा कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में एक्सपो आयोजन के लिए भुगतान भी कर दिया गया था। यदि वहां से फेयर अन्यत्र ले जाना था तो सीधे भदोही लाया जाना चाहिए था, हालाकि  अब परिषद् को मिलने के बाद तमाम राजनितिक विवाद खत्म  होने के आसार  है वही  परिषद् के अनुभव को देखते हुए निर्यातको का मानना है की मार्ट की सफलता में संदेह नहीं   है |

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