ग्रेटर नोएडा, 20 फरवरी भाषा दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में 43वां भारतीय हस्तशिल्प एवं उपहार मेला आईएचजीएफ-दिल्ली 2017 का आयोजन हुआ जहां।,700 करोड़ रपये के संभावित कारोबार के लिए पूछताछ की गई।
हस्तशिल्प के लिए निर्यात संवद्र्धन परिषद के कार्यकारी निदेशक राकेश कुमार ने कहा कि आज समाप्त हुए
आईएचजीएफ दिल्ली-2017 में इस साल 91 देशों के खरीदारों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा कि मेले में इस साल खरीदारों की ओर से।,700 करोड़ रपये की व्यापारिक पूछताछ की गई है।
यह मेला दुनिया के सबसे बड़े हस्तशिल्प और उपहार मेले के 43वें संस्करण, आईएचजीएफ- 2017 के दिल्ली दिल्ली वसंतोत्सव का आरंभ 16 फरवरी, 2017 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे में होगा। लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड ने इसे एक ही छत के नीचे लगने वाले हस्तकला प्रदर्शकों को दुनिया के सबसे बड़े समूह के रूप में मान्यता दी है। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राकेश कुमार ने बताया कि यह मेला 1,97,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला था ।
      देश भर से 900 स्थायी बाजारों (मार्ट) सहित 3,000 से अधिक प्रदर्शक, चौदह उत्पाद श्रेणियों से संबंधित उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रदर्शित करेंगे जिनमें घरेलू बर्तन, होम फर्निशिंग, फर्नीचर, उपहार और सजावटी समान, लैंप और लाइटिंग क्रिसमस और उत्सवी सजावटी समान, फैशन गहने और सामान, स्पा, कारपेट और कालीन, बाथरूम सामान, उद्यान उपकरण, शैक्षिक खिलौने और गेम्स, हस्तनिर्मित कागज उत्पाद और स्टेशनरी तथा चमड़े के बैग शामिल थे ।
      अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इस मेगा मेले में 80 देशों से ज्यादा देशों के 6500 से अधिक विदेशी खरीददार, भारतीय घरेलू खरीददारों के आने की उम्मीद है। प्रदर्शनी के स्थान में बढोत्तरी और आगंतुकों की संख्या में वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि यह मेला भारत के साथ साथ अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के खरीददारों के लिए भी कितना महत्तवपूर्ण है। यह मेला यह भी दर्शाता है कि विदेशी और देशी खरीददारों के लिए कितना महत्वपूर्ण है जहां उनके लिए एक छत के नीचे घरेलू संबंधी, लाइफस्टाइल, फैशन और कपड़ा उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं।
            घर, जीवन शैली, फैशन और वस्त्र उद्योग के लिए दुनिया के सबसे बड़े शो में कच्चे माल से निर्मित 2,000 से अधिक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृखंला पेश की जाएगी जिसमें  लकड़ी, धातु, बेंत और बांस, प्राकृतिक रेशों से बने वस्त्र, ऊन, रेशम, जूट, पत्थर, चमड़े, टेराकोटा, लाख और वनस्पति रंग शामिल हैं।
      इस शो के मुख्य आकर्षणों के तहत उत्तर पूर्वी क्षेत्र और जोधपुर मेगा क्लस्टर के उत्पादों की एक विषयगत प्रदर्शनी प्रस्तुत की जाएगी। लकड़ी के उत्पादों, लकड़ी के हस्तशिल्प वस्तुओं पर एक मंडप इसमें लगा रहेगा। उत्पादन तकनीक, कौशल विकास, जीएसपी योजना, प्रवृत्तियां और पूर्वानुमान, केंद्रीय बजट और आगामी जीएसटी पर चर्चा करने के लिए संबंधित जानकारीपूर्ण सेमिनार भी इस दौरान आयोजित किए जाएंगे।
      घरेलू खुदरा बाजार में अभूतपूर्व वृद्धि को साकार करने के उद्देश्य से परिषद ने ऑटम 2014 के दौरान घरेलू खुदरा व्यापारियों और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए आईएचजीएफ -दिल्ली मेले के दरवाजे खोल दिये थे। तब से, प्रमुख खुदरा ब्रांड और ई कॉमर्स कंपनियां जैसे- गुड अर्थ, फर्नीचर रिपब्लिक, फैब इंडिया, वेस्ट साइड, आर्चीज लिमिटेड, डीएलएफ ब्रांड्स लिमिटेड, @होम, शॉपर्स स्टॉप, लाइफस्टाइल ग्रुप, अरबन लैडर.कॉम, पीप्पेरफ्राई.कॉम, अजियो.कॉम, फैब फर्निश.कॉम, शॉपक्लूज.कॉम सहित अन्य दूसरी कंपनिया इस मेले में नियमित रूप से भाग ले रही हैं। इन कंपनियों ने मेले में भाग लेने के लिए खुद का पंजीकरण कराया है।
      मीडिया के साथ बातचीत में ईपीसीएच के ईडी श्री राकेश कुमार ने बताया कि 1994 में अपनी स्थापना के बाद से, आईएचजीएफ- दिल्ली मेले ने भारत के हस्तशिल्प व्यापार मे एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसने मेले में न केवल बड़ी संख्या में भारतीय निर्यातकों को भाग लेने के लिए सक्षम बनाया है बल्कि विदेशी खरीदारों को भी एक ही स्थान पर एक ही छत के नीचे उनकी आवश्यकता की चीजें मुहैया करायी हैं। उन्होंने कहा कि आईएचजीएफ द्वारा निभायी गयी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका से देश की विदेशी मुद्रा आय में बढ़ोत्तरी हुई है और इससे रोजगार भी पैदा हुए हैं।
      ईपीसीएच के चैयरमैन श्री दिनेश कुमार ने कहा कि यह हकीकत है कि अमेरिका और यूरोप भारत के प्रमुख खरीददार हैं लेकिन इसके बावजूद ईपीसीएच अब अपना ध्यान लातिन अमेरिका, मध्य एशिया, अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे नए उभरते बाजारों पर केंद्रित कर रहा है।
      अप्रैल 2016  से दिसंबर 2016 के दौरान हस्तशिल्प के निर्यात में 12.10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी, जो रूपये के संदर्भ में 17,939.05 रुपये करोड़ है। डॉलर के संदर्भ 2673.48 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ इसमें 8.25% की वृद्धि दर्ज की गयी। ईडी, ईपीसीएच ने बताया कि वर्ष 2016-17 के लिए निर्यात लक्ष्य 3600 मिलियन डॉलर (23,560.00 करोड़ रुपये) का रखा गया है और परिषद को उम्मीद है कि यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा।
      हस्तशिल्प निर्यात के विकास को बढ़ावा देने के लिए ईपीसीएच देश की एक नोडल एजेंसी है।

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